Sunday, July 26, 2020

बेज़ुबान काग़ज़


एक साधारण सा सफ़ेद काग़ज़ ही तो हूं मैं, कभी कीमती तो कभी रद्दी या किसी के पैरों के नीचे रहता हूं। जब बच्चे मुझे हवाई जहाज बना कर उड़ाते है तो ऐसा लगता है मानों थोड़े ही देर के लिए सही '' दुनिया मुझे अपने सर आंखो पे बिठाने की तैयारियां कर रही है ", पर सच तो यह है की मुझे भी नहीं पता होता है की कहा जा कर गिरूंगा।
अभी मॉनसून है भाईसाहब और लॉक डाउन भी... गली में जल- जमाव की स्थिति में बच्चे तो मुझे नाव बनाकर अपना मन बहला रहें हैं, उनकी छोटी - छोटी खुशी का हिस्सा बन कर मेरे मन को सुकून मिलता है।
कभी नाव, तो कभी हवाई जहाज या जब नसीब अच्छा हुआ तो 'काग़ज़ के फूल' जहां रंग बिरंगे काग़ज़ की भेराइटी है - जैसे, चमकीला, गोल्डन इत्यादी।
स्कूल में डिस्प्ले बोर्ड पर मुझे गुलाब, कमल फूल बना कर बच्चे सजाया करते हैं, फिर क्या?
   कुछ महीनों के बाद धूल की चादर में लिपटे हुए और कोने में पड़े हुए कचरे के ङब्बे में डाल दिए जाते हैं।
 फिर से बच्चे वहीं उमंग और उत्साह के साथ फूल नहीं तो इस बार सितारा बना कर सजाने में लगे हैं, मैं भी कहीं "गोल्डन तो कहीं सिल्वर" सजावट से चमकने के लिए तैयार बैठा हूं, एकदम "selfie ready" थोड़े ही देर के लिए सही "सेलिब्रिटी वाला फिलिंग भी आना लाज़मी है 😎 instagram से लेकर whatsapp के स्टैटस में मैं ही हूँ और वो भी कैप्शन के साथ पर उन्हें क्या पता उनके जाने के बाद फिर से ना हमे कोई देखने वाला होगा और कुछ दिनों के बाद डस्टबीन में ही मेरी जगह होगीं, खैर यह सिलसिला तो चलता रहेगा, आप सभी इस मॉनसून पकौड़े खाइए और मौसम का आनंद लीजिए..
अरे! याद आया, जब गरम पकौड़े को मुझमे लपेट कर परोसा जाता है और कुछ बुद्धजीवि  स्वाद का ज़ायका ले कर मुझे इधर-उधर फेंक कर गंदगी फैला कर चले जाते हैं, मैं चीख़ता हूं, चिल्लाता हूं पर शायद मेरी आवाज़ उनके कानों तक नहीं पहुंची है। काग़ज़ पर लिखावट या सजावट जचती है.. ना की लपटें हुए रोटी या पकौड़े मगर अब किसे समझाना.. मैं भी एक मामूली सा काग़ज़ जो आग में गिरे तो राख और पानी में गिरे तो साफ़..
अब तो अगली बारिश का इंतजार रहेगा जब बच्चे मुझे नाव बनाकर एक छोर से दूसरे छोर जाते देख अपनी बचपन की यादों को संजोएगें।

Awwरत : Menstruation Matters!

 Why don’t we call menstruation by its name?  Menstruation surely opened up a discussion which for long time was kept discreet and hush-hush...